तुम ‘एक मानव’

हम संसार के सबसे विध्वंसकारी प्राणी हैं । जगत को मिटाने वाले जलवायु परिवर्तन के पीछे केवल हमारा ही हाथ है, जिसके कारण पृथ्वी पर निवास करने वाले सभी प्राणिओं की उम्र 10 से 15 प्रतिशत घाट चुकी है । पृथ्वी पर सबसे बुद्धिमान प्राणी होने पर भी हमने अपने भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है ।

वह प्रत्येक व्यक्ति मानव है जो हमारे साथ जुड़ा हुआ है, वह प्रत्येक व्यक्ति मानव है जो अपने आप को पृथ्वी का पुत्र समझता है, वह प्रत्येक व्यक्ति मानव है जो अपने आप को एक रक्षक समझता है, वह प्रत्येक व्यक्ति मानव है जो संसार में व्याप्त अंधकार को देख सकता है, वह प्रत्येक व्यक्ति मानव जो इस अंधकार को मिटाना चाहता है, वह प्रत्येक व्यक्ति मानव है जो दुसरो के लिए जीना जानता है, वह प्रत्येक व्यक्ति मानव है जो मानव बनना चाहता है, वह प्रत्येक व्यक्ति मानव है जो अपना कल्याण करना चाहता है, वह प्रत्येक व्यक्ति मानव है जो संसार का कल्याण करना चाहता है। मानव पृथ्वी पर एक आशा है, मानव पृथ्वी पर एक राजा है, मानव निज राष्ट्र का एक सच्चा अंश है, मानव निर्धन के लिए धन है, मानव पृथ्वी पर एक जीत है, मानव दुखी मनुष्य के लिए सुख है, मानव प्यासे मनुष्यों के लिए पानी है, मानव मरते हुए व्यक्ति के लिए जीवन है, मानव व्याप्त अंधकार में व्यापक प्रकाश है, मानव प्राणरहित ब्रम्हाण्ड में सांस भरती हुई पृथ्वी है, मानव भूके व्यक्ति के लिए रोटी है, मानव अनाथ बच्चों के लिए पिता है, मानव रेगिस्तान में खड़ा एक पेड़ है, मानव पीड़ित पशुओं की आवाज है, मानव रोते हुए चेहरे पर मुस्कान है, मानव भीषण हुंकारों में एक शांति है, मानव जलवायु परिवर्तन के लिए एक परिवर्तन है।

मैं अब आपसे पूछता हूँ – क्या आप एक मानव हो? केवल मानव की तरह दिखने का अर्थ यह नहीं की आप मानव हैं मानव गुणों से बनते हैं दिखावट से नहीं। यदि आपके पास वह सब गुण है जो ऊपर गिनाये गए हैं तो निश्चित ही आप एक मानव हैं। आइये अब यह समझते हैं की यही गुण क्यों एक व्यक्ति को मानव बनाते हैं? इनसे अलग और भी कई कार्य या गुण हैं जो उसे सफल या धनवान बना सकते हैं। तो देखिये समझते हैं कि सच में एक मानव कौन है? वह जो धनी है?, जो सुखी है?, जो सफल है? या वह जिसमे मानवता है? जिसमे मानवता है वही मानव है। अब यह मानवता क्या है – वह गुण जो मानव को दयालु होना सिखाता है, वह गुण जो उसे दयामय बनाता है, वह गुण जो उसे सुहृदय बनाता है, वह गुण जो उसे कोमल स्वाभाव का बनाता है, और हमारी वह क्षमता और गुण जो हमे दूसरे प्राणियों से पृथक करते हैं, जैसे – दूसरों से स्नेह करने की योग्यता, रचनात्मक होने की योग्यता आदि। यहाँ हमने समझा कि मानवता ही किसी व्यक्ति को मानव बनाती है। अब हम उस दूसरे पहलू पर बात करते हैं जहाँ मानव की सही पहचान ज्ञात होती है – कर्त्तव्य पालन। अब एक व्यक्ति जो मानव-कर्त्तव्यों का पालन करता है वह मानव है? या जो मानव शरीर रहकर किसी दूसरे प्राणी के कार्य या कर्त्तव्य करता है वह मानव है? जो मानव-कर्त्तव्यों को करता है वही मानव है। मानव कर्त्तव्य क्या हैं? समझिये कि मानवों के कर्त्तव्य बदल सकते हैं उनके परिवार, घर या परिस्थितियों के कारण, परन्तु कुछ कर्त्तव्य ऐसे होते जिनका पालन करना अनिवार्य होता है मानव शरीर को सफल बनाने के लिए।

जैसा कि हम जानते है कि मानव संसार के सबसे बुद्धिवान और विवेकवान प्राणी है हम सबके पास स्वतंत्रता है यहाँ से वहां जाने की या पृथ्वी पर कुछ भी करने की अर्थात यदि हम पृथ्वी पर कोई कार्य करना चाहते हैं तो हमे किसी अन्य प्राणी से आज्ञा लेने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकी सबसे विवेकवान होने के नाते इस पृथ्वी पर मानवों का अधिकार है, क्या एक सिहं या अन्य प्राणी इसका अधिकारी हो सकता है? नहीं! तो अब एक सिद्धांत हमारे समक्ष आता है की यदि किसी वस्तु पर हमारा अधिकार है तो उसकी रक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है जिस प्रकार ईश्वर का अधिकार इस सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड पर है तो वह इसकी एक निश्चित समय तक रक्षा करते हैं, एक राजा एक राज्य पर अधिकार करता है तो वह उसकी रक्षा करता है उसे समृद्ध बनाता है, और अगर उसके राज्य में कोई अन्याय या अधर्म हो रहा है तो इसका उत्तरदायी राजा होगा। इसी प्रकार पृथ्वी पर जो अब अंधकार फैला है, अधर्म फैला है, वायु पदूषण, जल प्रदुषण, जलवायु परिवर्तन, 50% एक आसपास पशुओं का विलुप्त होना इसका उत्तर कौन है? एक मानव। हम कुछ भी होने से पहले एक मानव है भाई होने से पहले, बहन होने से पहले, माता-पिता होने से पहले हम एक मानव हैं क्योंकि हम एक बेटा हैं या बेटी हैं यह हमारे जन्म के पश्चात निश्चित होता हैं परन्तु हम एक मानव हैं या तो माता के गर्भ में ही पता चल जाता है। इसलिए स्वयं को अंधकार से निकाल के जगत को अंधकार से निकलना ही हमारा कर्त्तव्य है। अब अगर आप अपने इस कार्य को नहीं करते हैं तो क्या आप मानव हैं? नहीं! आप केवल एक प्राणी हो अन्य पशुओं की तरह।
अगर कोई चोर चोरी नहीं करता तो क्या वह चोर कहलाएगा? नहीं! इसी प्रकार अगर आप निज करणीय को नहीं करोगे तो क्या मानव रह पाएंगे? नहीं! आप मानव शरीर मिलने पर भी इससे नीच कार्य करने वाली योनि में जियेंगे।

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