प्यासी धरती

‘जल’ जिसे हम अपना जीवन भी कहते हैं, पृथ्वी पर जलने लगा हैं। अपने जीवन के निमित्त को जन अगर इतनी मूर्खतापूर्ण बर्बाद करेंगे तो जो प्राणी सबसे बुद्धिमान और विकासशील समझा जाता है कुछ दिन पश्चात् निज विकास और बुद्धिहीनता पर रोने वाला है। हम नहीं जानते कितने लोग जल-अल्पता से मरते हैं, हम नहीं जानते कितने बच्चे जल प्रदुषण के कारण जन्म लेने से पूर्व ही मर जाते हैं पर क्या हम यह भी नहीं जानते की हम एक मानव हैं? हम नहीं जानते पृथ्वी जल रही है, हम नहीं जानते हम मूर्खता कर रहे हैं, हम नहीं जानते हम नष्ट होने वाले हैं, पर क्या हम यह भी नहीं जानते की हम ईश्वर के अंश हैं?
जल बचाने के लिए हमे अपने स्वार्थ को त्यागना पड़ेगा, संसार तुम्हारी दिव्यता को देखना चाहता है, संसार तुम्हारे बंधुत्व को ग्रहण करना चाहता है। तुम्हारे द्वारा बचाया गया थोड़ा-सा भी जल किसी असहाय के लिए जीवन बन सकता है।

सम्पूर्ण संसार को अपना अंग मानो, अपना परिवार मानो – क्यों तुम्हारा पुत्र दूषित जल से मर रहा है, क्यों तुम्हारी पुत्री प्रदुषण से मर रही है, क्यों तुम्हारी माता तुम्हारी अनंत शांति को सुनकर रोने लगी है।

आ हि ष्मा सूनवे पितापिर्यजत्यापये।
सखा सख्ये वरेण्यः॥

ऋग्वेद, प्रथम मंडल, षड्विंशं सूक्तं, मंत्र-३ में लिखा है कि जिस प्रकार एक पिता अपने पुत्र के लिए सुख का कारण होता है, एक मित्र अपने दूसरे मित्र के लिए सुख का कारण होता है, एक गुरु अपने शिष्यों के लिए सुख का कारण होता है उसी प्रकार एक मानव को प्रत्येक मानव के लिए सुख का कारण होना चाहिए ।

जिन कर्तव्यों का पालन करने के लिए वेदों कि ऋचाएं भी कह रही हैं वह कोई साधारण कार्य नहीं। तुम्हारी महानताओं कि छाया में विश्राम करने के लिए यह उत्पीड़ित जग अन्यमनस्क हो रहा है। कुछ शब्द जो स्यात हमे हमारी महानताओं का स्मरण करा सकें –

चाहें तो ये सृष्टि को नचा सकते हैं,
ये वो वीर हैं जो अपनी माँ को बचा सकते हैं।
चाहें तो ये अनहोनी को बदल सकते हैं,
ये वो शेर हैं जो काँटों पर भी टहल सकते हैं।
चाहें तो ये बात समझ सकते हैं,
ये वो जुगनू हैं जो उजाले में भी चमक सकते हैं।
चाहें तो ये हिमालय को झुका सकते हैं,
ये वो तूफान हैं जो सूरज को भी भुजा सकते हैं।
ये चाहते नहीं कुछ इसी से तो धरती पराजित है,
बताओ, सोच के मुझको, बिना माँ के कहाँ हित है॥

आइये, अब देखते हैं कि हमारी कौन सी महानताएँ पृथ्वी माँ के लिए अपने पुत्रत्व को सिद्ध कर सकती हैं –

Money, Idea, Business, Man, Bulb, Capital, Crowdfunding

धन को धनवान बनाओ अर्थात मूल्यवान बनाओ

हम सभी अपने जीवन में धन कमाते हैं और स्यात सभी उसे निज जीवन में किसी न किसी तरीके से व्यय भी करते हैं। अधिकतम, धन कमाने के पीछे व्यक्तियों की निम्नलिखित इच्छाएं होती है, जैसे-
सुख प्राप्त करना, अच्छा घर बनाना, अच्छा भोजन प्राप्त करना, अच्छे वस्त्र पहनना आदि।
अगर साधरण शब्दों में कहें तो आप धन के द्वारा अपनी इच्छाओं की पूर्ति करना चाहते हैं, परन्तु क्या धन का यह व्यय श्रेष्ठ व्यय होगा जब हमारा देश सूखा जा रहा हो, रोता हो, अज्ञानता में जीता हो। यदि निष्पक्ष उत्तर दिया जाए तो नहीं, क्योंकि
वाणी सरस्वती यस्य भार्या पुत्रवती सती।
लक्ष्मीः दानवती यस्य सफलं तस्य जीवितं॥
अर्थ – जिसकी वाणी सरस्वती है अर्थात गुणवती, ज्ञानदा (ज्ञान देने वाली), उत्तम गुणों से सुसज्जित तथा विद्या प्रदान करने वाली है, जिसकी पत्नी पुत्रवती है तथा जिसकी लक्ष्मी दानवती है अर्थात जिसका धन दूसरों की पीड़ा ,भूख आदि मिटाने में व्यय होता है उसका जीवन सच में एक सफल जीवन है।
दानोपभोगरहिता दिवसा यस्य यान्ति वै।
स लोहकारभस्र एव श्वसननदि न जीवति॥
अर्थ -जिसका दिन दान दिए बिना व्यतीत होता है वह सांस लेते हुए भी लोहार के धमन की भांति जीवंत नहीं है।
अब दान देने का अर्थ ये नहीं कि किसी को भी धन देदो, सुपात्र को दिया हुआ धन ही विश्व के काम आ सकता है कुपात्र को दिया हुआ दान दाता को भी नष्ट करता है और लेने वाले को भी। इसकी पुष्टि मनु जी ने अपने ग्रन्थ मनुस्मृति में भी की है।

आप सोचेंगे ये शब्द तो उन ऋषिमुनियों के हैं जिनके पास धन ही नहीं था और जो दान पर ही जीते थे, तो नहीं वे ही तो सम्पूर्ण ऐश्वर्य के राजा थे, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के हिरण्य आदि उनके चरणों के दास बनने को तैयार रहते थे।
और महर्षि मनु एक महान ऋषि होने के साथ साथ भारतवर्ष के प्रथम राजा भी थे। सत्यवादी हरिश्चंद्र, राजा भोज, राजा जनक, महादानी कर्ण ये सभी इन्ही महान सिद्धांतों पर जीए थे।

मैं आपसे आपका पूरा धन दान करने के लिए नहीं कहता, केवल अपनी मासिक राशि का 5% दान करने का सामर्थ्य रखो। देखिये, इस संसार में बहुत धन है जिसका अगर सही तरह से उपयोग किया जाए तो संसार की कई दुविधाएं समाप्त हो जाएंगी। मैं जानता हूँ यह इतनी बड़ी धनराशि नहीं जो दान न की जा सके। भारत में कई ऐसी संस्थाएं है जो लगनशील तथा ह्रदय की सच्ची हैं और मुझे यह पूरा विश्वास है की वह आपकी दान की हुई महानता में से छोटे से अंश को भी व्यर्थ नहीं जाने देंगी। आप हमें भी एक बार अपनी महानता से इस देश की प्यास भुजाने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।
हम अब तक प्रकृति को बहुत बुरी तरह से नष्ट कर चुके हैं इसलिए कबीरदास के इस दोहे का उत्तर देने का समय अब आ चूका है –
बकरी पाती खात है ताकी काढ़ी खाल।
जो नर बकरी खात हैं तिनको कौन हवाल॥

Kid, Boy, Fear, Afraid, Child, Running, Running Away

नकारो मत

वास्विकता में यह आपकी एक महानता भी है और आपसे हमारी एक विनती भी –
आप कहीं भी कैसा भी कार्य कर रहें हो अगर जल फैलता हुआ या कोई जल को फैलता हुआ दिखे तो कृपया आप हमें अवश्य सूचित करें। आप कॉल के द्वारा, व्हाट्सअप के द्वारा फेसबुक के द्वारा या ईमेल के द्वारा हमें सूचित कर सकते हैं।

बहुत हो गया जल का नाश,
अब हम आएंगे जल के साथ ।


फ़ोन और व्हाट्सअप नंबर :- 8273982728, 8868890678, 8193033772, 8868021151

और जानकारी आप कॉन्टेक्ट पेज पर जाकर ले सकते हैं।

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