Ankit Upadhyay

प्यासी धरती

‘जल’ जिसे हम अपना जीवन भी कहते हैं, पृथ्वी पर जलने लगा हैं। अपने जीवन के निमित्त को जन अगर इतनी मूर्खतापूर्ण बर्बाद करेंगे तो जो प्राणी सबसे बुद्धिमान और विकासशील समझा जाता है कुछ दिन पश्चात् निज विकास और बुद्धिहीनता पर रोने वाला है। हम नहीं जानते कितने लोग जल-अल्पता से मरते हैं, हम …

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मानव

मानवाकांक्षा मैं इस संसार का कल्याण करना चाहता हूँ, मैं नव संसार का निर्माण करना चाहता हूँ। हे ईश्वर, हे निखिल जग के सहारे, मैं इस भू-लोक को निर्वाण करना चाहता हूँ॥ धरा की आंख से आंसू नहीं अनुराग बरसे, यहाँ रोते हुए बच्चों के मुख से राग बरसे, यहाँ डूबे नहीं सूरज कभी नव …

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तुम ‘एक मानव’

हम संसार के सबसे विध्वंसकारी प्राणी हैं । जगत को मिटाने वाले जलवायु परिवर्तन के पीछे केवल हमारा ही हाथ है, जिसके कारण पृथ्वी पर निवास करने वाले सभी प्राणिओं की उम्र 10 से 15 प्रतिशत घाट चुकी है । पृथ्वी पर सबसे बुद्धिमान प्राणी होने पर भी हमने अपने भविष्य को अनिश्चितता में डाल …

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Manav